पानी एसी के कंप्रेशर में से नहीं बल्कि उसके कूलिंग सेक्शन या कूलिंग यूनिट से निकलता है। कूलिंग यूनिट की ट्यूब्स इतनी अधिक ठंडी होती हैं की जब ब्लोअर के द्वारा कमरे की हवा को इन ट्यूब्स के ऊपर से होकर गुजारा जाता है तो हवा में मौजूद भाप या नमी ठंडी होकर वापस पानी में बदल जाती है और कूलिंग ट्यूब्स पर पानी की बूंदों के रूप में जमा हो जाती हैं और जैसे जैसे कूलिंग ट्यूब्स पर पानी की इन बूंदों की मात्रा बढ़ने लगती है ये इकट्ठा होकर पानी के रूप में बहकर निकास या आउट लैट ट्यूब के रास्ते एसी से बाहर निकल जाती हैं। अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि एसी में से जो पानी निकलता है वह कंप्रेशर में नहीं बल्कि कमरे की हवा में ही नमी या पानी की भाप के रूप में मौजूद होता है और इसी भाप या नमी के एसी में ठंडा होकर संघनित (condense) होने के कारण यह पानी उत्पन्न होता है। आसपास के वातावरण या कमरे की हवा में जितनी अधिक नमी होगी एसी में से उतना ही अधिक भर भर कर पानी बाहर निकलेगा और यह पानी लगभग आसवित जल (distilled water) के बराबर ही शुद्ध होता है।
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